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मौत के दो हफ्ते बाद भी कार्यवाही शून्य, निजी अस्पताल पर प्रशासन मेहरबान,

मरीज की मौत के बाद भी जांच कछुआ गति से, जिम्मेदार पर कब गिरेगी गाज

मौत के दो हफ्ते बाद भी कार्यवाही शून्य, निजी अस्पताल पर प्रशासन मेहरबान
मरीज की मौत के बाद भी जांच कछुआ गति से, जिम्मेदार पर कब गिरेगी गाज

रेहटी-रेहटी स्थित निजी अस्पताल विजयासन हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मरीज की मौत के मामले में लगभग दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शुरुआत में जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक मामला सिर्फ जांच के दायरे में ही घूमता नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार ग्राम बोरघाटी निवासी मनीराम को तबीयत बिगड़ने पर रेहटी के निजी विजयासन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासनिक टीम ने जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया था।
लेकिन अब लगभग दो हफ्ते बीतने को हैं और जांच की रफ्तार पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामले में पहले भी कई बार अधिकारियों ने “जांच जारी है” कहकर जवाब दिया, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि आखिर दोषी कौन है और कार्रवाई कब होगी।
इस मामले में बात करने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सीहोर डॉ. सुधीर डेरिया ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच जारी है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट ली जा रही है। हालांकि इस बयान के बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि लगभग दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद जांच इतनी धीमी गति से क्यों चल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला स्पष्ट होने के बावजूद जांच “कछुआ गति” से आगे बढ़ रही है। आरोप है कि जिस अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं था, वहां हृदय संबंधी समस्या वाले मरीज का इलाज किया गया और अंततः उसकी मौत हो गई। ऐसे में जांच में देरी कई तरह के सवाल खड़े कर रही है। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि कई गंभीर मामलों में पुलिस 24 घंटे के भीतर हत्या या डकैती जैसे मामलों का खुलासा कर देती है, लेकिन इस मामले में दो सप्ताह बाद भी जांच का कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है। वहीं ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर स्तर पर भी कार्रवाई को लेकर केवल पत्राचार और रिपोर्ट की प्रक्रिया चलने की बात कही जा रही है।
इस पूरी स्थिति को लेकर क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कहीं जांच को जानबूझकर लंबा तो नहीं खींचा जा रहा, ताकि समय बीतने के साथ मामला ठंडा पड़ जाए और निजी अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई का दबाव कम हो जाए।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होगी और दोषियों पर कब कार्रवाई होगी, या फिर जांच के नाम पर मामला धीरे-धीरे फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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