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आवली घाट गौशाला में गायें कुपोषण की शिकार, मक्के की पत्ती का भूसा खिलाकर निभाई जा रही खानापूर्ति

बलराम सिसोदिया-9893862663

आवंलीघाट गौशाला में गायें कुपोषण की शिकार,मक्के की पत्ती का भूसा खिलाकर निभाई जा रही खानापूर्ति

खबरें प्रकाशित होने के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
रेहटी : बुधनी जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत आवली घाट मे स्थित गौशाला में गौमाताओं की हालत लगातार चिंताजनक होती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि गौशाला की बदहाल स्थिति को लेकर खबरें प्रकाशित होने और सोशल मीडिया पर वीडियो-तस्वीरें वायरल होने के बावजूद प्रशासन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका है। वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि गौशाला में मौजूद गायें अत्यंत कमजोर, कुपोषित और बीमार अवस्था में हैं। उनकी हालत देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि उन्हें भरपूर चारा-पानी और पोषणयुक्त खुराक नहीं मिल रही है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार गौशाला में कार्यरत कर्मचारियों ने स्वयं स्वीकार किया है कि चारा नहीं मिलने के कारण गायों में कमजोरी बढ़ रही है और इसी कारण मौतें भी हो रही हैं। हाल ही में जब पत्रकारों की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति देखी तो वहां गायों को मक्के की पत्ती का भूसा खिलाया जा रहा था, जो खाने योग्य नहीं माना जाता। मौके पर दो गाय गंभीर अवस्था में भी देखने को मिलीं, जिनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।
इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर पंचायत का सचिव इतना प्रभावशाली है या किसी ऊंची पहुंच वाले व्यक्ति का संरक्षण है, जिसके चलते अब तक कार्रवाई नहीं हो रही। लगातार वीडियो वायरल होने और जनता के सामने स्थिति उजागर होने के बावजूद प्रशासन आंख मूंदकर बैठा हुआ है।
जनपद पंचायत सीईओ ने भी इस संबंध में जिम्मेदारी से बचते हुए कहा कि “इस मामले में जानकारी और बयान कलेक्टर एवं जिला पंचायत के कार्यपालन अधिकारी द्वारा दिया जाएगा, मेरे स्तर पर नहीं।” इससे साफ प्रतीत होता है कि अधिकारी केवल पल्ला झाड़ने का काम कर रहे हैं और गौमाताओं की हालत सुधारने की दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं हो रही। धर्म के ठेकेदारों की चुप्पी पर भी उठे सवाल गौर करने वाली बात यह भी है कि गांव में कुछ तथाकथित धर्म के ठेकेदार और नेता जब चाहें तब गौमाता के नाम पर राजनीति करते हैं, बड़े-बड़े भाषण देते हैं, लेकिन जब उन्हीं से जुड़े लोग गौशाला का संचालन करते हैं और वहां गायें भूख-प्यास से तड़पती हैं, तब यही लोग चुप्पी साध लेते हैं। यह दोहरा रवैया अब जनता के सामने उजागर हो चुका है। गौमाता को सिर्फ स्वार्थ के समय याद करने की परंपरा
धार्मिक दृष्टि से भी यह मामला अत्यंत गंभीर है। हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है। जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो 13 दिन के कर्मकांड, श्राद्ध, पिंडदान और गया जी तक की परंपरा में गौदान और गाय को भोजन कराने का विशेष महत्व बताया गया है। श्राद्ध में गाय का हिस्सा निकालकर देने की परंपरा भी इसी कारण है। ऐसे में सवाल यह है कि जब कर्मकांड के समय गौमाता मोक्ष का माध्यम बन जाती है, तो बाकी दिनों में उसे सिर्फ “चार पैर का जानवर” समझकर भूखा क्यों छोड़ा जा रहा है? अब बड़ा सवाल यह है कि इन मूक गौमाताओं को न्याय कौन दिलाएगा? गौशाला संचालन में हो रहे भ्रष्टाचार की जवाबदेही कौन तय करेगा? और क्या प्रशासन दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी केवल वायरल वीडियो और खबरों तक ही सीमित रह जाएगा? जनता की मांग है कि आवली घाट गौशाला की तत्काल जांच कराई जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और गायों के लिए पर्याप्त चारा, पानी, दवा और पशु चिकित्सा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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