बुधनी भाजपा में बढ़ता असंतोष, कांग्रेस से आए नेताओं को तवज्जो पर उठने लगे सवाल
बलराम सिसोदिया-9893862663

बुधनी भाजपा में बढ़ता असंतोष, कांग्रेस से आए नेताओं को तवज्जो पर उठने लगे सवाल
बुधनी-बुधनी विधानसभा की राजनीति इन दिनों चर्चाओं के केंद्र में है। पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेतृत्व में नाराज़गी लगातार बढ़ती दिख रही है। वजह साफ है — कांग्रेस से आए नेताओं को दी जा रही तवज्जो, पार्टी के लिए जमीन पर मेहनत करने वाले पुराने कार्यकर्ताओं को संगठन में अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं मिल पा रही। स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा ने कांग्रेस से आए नेताओं को जिस तेजी और उदारता से पद दिए, वही अब उसके लिए सिरदर्द बन रहा है। कई पदाधिकारी, जिन्हें हाल ही में मंचों पर जगह एवं पद मिला, उन पर भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच “दोहरा खेल” खेलने के आरोप तक लग रहे हैं। चुनावी समय में ऐसे नेताओं और उनके परिवारों की कांग्रेस प्रत्याशी के साथ नजदीकियों की भी जमकर चर्चा रही। कार्यकर्ताओं का मानना है कि भाजपा ने ऐसे लोगों पर भरोसा किया, जिन्होंने बाद में पार्टी की पीठ में छुरा घोंपने जैसा व्यवहार किया।उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को मिली अपेक्षाकृत कम जीत भी इसी नाराजगी का नतीजा मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान ने लगभग डेढ़ लाख मतों से ऐतिहासिक बढ़त हासिल की थी, लेकिन उपचुनाव में कांग्रेस के राजकुमार पटेल मात्र 15 हजार मतों के अंतर से ही हारे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इतने कम अंतर के पीछे भाजपा के भीतर की अंदरूनी कलह और गुटबाजी की भूमिका अहम रही। जमीनी भाजपा नेता अपने आप को पार्टी में ठगा सा महसूस कर रहे हैं।


