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रेहटी में गरीबों का हक छीन रहे अमीर- बीपीएल और पात्रता पर्ची की सूची में 812 नाम

कई चौंकाने वाले खुलासे की तैयारी

रेहटी में गरीबों का हक छीन रहे अमीर- बीपीएल और पात्रता पर्ची की सूची में 812 नाम, कई चौंकाने वाले खुलासे की तैयारी

रेहटी-रेहटी नगर परिषद क्षेत्र में गरीबों को वितरित किए जाने वाले राशन पर अमीर और प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा डाका डाले जाने की जानकारी लगातार सामने आ रही हैं। नगर परिषद द्वारा दी गई बीपीएल कार्ड धारकों और पात्रता पर्ची धारकों की सूची ने इन आशंकाओं को और भी पुख्ता कर दिया है। परिषद की सूची के अनुसार रेहटी में कुल 812 परिवार ऐसे हैं। जो सरकारी रियायती राशन का लाभ ले रहे हैं। लेकिन इस सूची में कई ऐसे नाम शामिल हैं जो चौंकाने वाले हैं। नगर परिषद रेहटी ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लाभ ले रहे हितग्राहियों की संख्या स्पष्ट कर दी है। जिसमें बीपीएल कार्ड धारक 278, पात्रता पर्ची धारक 534,कुल हितग्राही परिवार 812 हैं। सूत्रों के अनुसार इन 812 नामों में से एक बड़ा हिस्सा ऐसे लोगों का है जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं। जिनके पास पक्के मकान,चार पहिया वाहन हैं। वह शासकीय योजनाओं के तहत गरीब होने का कोई मापदंड पूरा नहीं करते। बावजूद इसके वह वर्षों से गरीबों के हिस्से का राशन उठा रहे हैं।

खुलासा जल्द- अमीर लाभार्थियों की पोल खोलने की तैयारी

इस मामले में पत्रकारों और स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा अमीर लाभार्थियों के नाम उजागर करने के लिए तथ्य और प्रमाण जुटाए जा रहे हैं। इन तथ्यों में उनके रहन-सहन का स्तर, आय के स्रोत, अचल संपत्ति का विवरण और वाहनों का पंजीकरण जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ शामिल हैं। जिससे जल्द ही उन चौंकाने वाले नामों का खुलासा हो सकता हैं। जो गरीबी रेखा के दायरे से बाहर होने के बावजूद सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे है।

इस मामले में नगर परिषद और खाद्य आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। नागरिकों का कहना है कि इतने वर्षों से अमीर लोग बीपीएल और पात्रता पर्ची का लाभ ले रहे थे लेकिन सूची के सत्यापन और अपात्र लोगों को बाहर निकालने की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों ने क्या कभी निष्पक्ष जांच की? यह माना जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत हो सकती है। यदि सूची में 812 में से 10 प्रतिशत नाम भी अपात्र पाए जाते हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि लगभग 80 से अधिक गरीब परिवारों का राशन हर महीने अमीरों द्वारा हड़पा जा रहा है।

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