गरीबों के हक पर डाका: अपात्र अमीरों को लेकर सजग नहीं हो रहा प्रशासन
बलराम सिसोदिया-9893862663

रेहटी-नगर रेहटी में बड़ी संख्या में ऐसे लोग गरीबी रेखा से नीचे श्रेणी का राशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। जो वास्तव में संपन्न हैं और सामान्य रुप से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इस धांधली के कारण वास्तविक गरीब और पात्र हितग्राही आज भी सरकारी लाभ से वंचित हैं। इस मामले में अपात्र अमीरों को लेकर प्रशासन की ओर से कोई भी कदम नहीं उठाया गया है। राजनीतिक दबाव के कारण ऐसे परिवार अभी भी गरीबों के हक पर डाका डालने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। बीते दो दिनों से लगातार गरीबों को उनका हक दिलाने के लिए मुहिम चलाई जा रही है। जिसके तहत गरीबी रेखा से ऊपर आने वाले परिवार जो शासन की योजना का गलत तरीके से उपयोग करते हुए लाभ ले रहे हैं ऐसे लोगों को बेनकाब करना है। गरीबी रेखा का लाभ लेने वाले कई ऐसे परिवार भी हैं जो हकीकत में लाखों रुपए की संपत्ति के मालिक है। लेकिन शासन की फ्री की योजना का लाभ लेने के लिए वह बीते कई वर्षों से गरीब बनाकर लाभ ले रहे हैं। जानकारी के मुताबिक रेहटी में वर्तमान में बीपीएल कार्ड धारक एवं पात्रता पर्ची के माध्यम से 800 से अधिक लोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ उठा रहे हैं। इसमें लगभग 200 से अधिक बीपीएल कार्ड धारक शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में लगभग 75 से अधिक लोग ऐसे भी हैं जिनका जीवन यापन का स्तर सामान्य श्रेणी के नागरिकों से भी बेहतर है। इन लोगों को बीपीएल सूची में शामिल कर सरकारी राशन का लाभ देना सीधे तौर पर गरीबों के हक का हनन है।
पक्का मकान- जमीन-जायदाद फिर भी शासन की निगाह में गरीब
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नगर में 75 से अधिक ऐसे परिवार है जो शासन की योजना का लाभ लेने में सबसे आगे हैं। इन परिवारों की जीवनशैली और संपत्ति का आकलन यह स्पष्ट करता है कि वह गरीबी रेखा से काफी ऊपर हैं। योजना का लाभ लेने वालों के पास पक्का मकान खेती की जमीन व चार पहिया वाहन भी मौजूद है।
जबकि बीपीएल श्रेणी के लिए कच्चे या बहुत छोटे मकान की शर्त होती है। लेकिन कई परिवारों के पास पर्याप्त आकार केमजबूत पक्के मकान हैं। इसके अलावा पर्याप्त कृषि भूमि जिसकी आय का स्तर गरीबी रेखा से कई गुना अधिक हो जाता है।इतना ही नहीं इन परिवारों में चार पहिया वाहन भी मौजूद हैं। सरकारी नियमों के अनुसार चार पहिया रखने वाले परिवार स्वतः ही बीपीएल पात्रता से बाहर हो जाते हैं।
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पात्र गरीब वंचित, न्याय की मांग, फिर भी प्रशासन मौन
एक तरफ जहां संपन्न लोग फर्जीवाड़ा करके गरीबों का राशन खा रहे हैं,।। वहीं दूसरी तरफ नगर में लगभग 150 से अधिक ऐसे परिवार हैं। जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, और पात्रता की सभी शर्तों को पूरा करते हैं। लेकिन उनका नाम अभी तक बीपीएल सूची या पात्रता पर्ची की श्रेणी में नहीं आ पाया है। यह डेढ़ सौ परिवार आज भी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। इस विसंगति ने स्थानीय प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


